• Dr. RK Singh, ADG(FFC) addresing at the Annual Group Meetings of Millets

  • Release of publication on Potential Proso Millet Genotypes

  • Discussion with delegates from CIIRO, Australia on issues related to cropping in Sorghum and biofuels

  • Farmers being explained about Sorghum production technology

  • Dr. Rakesh Kumar Sharma, Former Director, DFRL, appraised about value addition of Millets

अनुसंधान केंद्र के बारे में

भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत ज्वार तथा अन्य कदन्नों पर बुनियादी एवं नीतिपरक अनुसंधान में कार्यरत एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है । भाकअनुसं ज्वार, बाजरे एवं लघु कदन्नों पर अभासअनुप के माध्यम से ज्वार, बाजरे व अन्य कदन्नों के अनुसंधान कार्यों का समन्वय करता है एवं सुविधाएं प्रदान करता है विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों के साथ संबंध स्थापित करता है।

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कदन्नों के बारे में


मिलेट प्राचीन सुपर अनाज एक बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण के जलाशयों हैं। मिल्कलेट्स (ज्वार, मोती बाजरा और छोटे बाजरा) अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भोजन और चारा फसलें हैं... अधिक

अधिदेश (लक्ष्य)

 

  • कदन्नों की उत्पादकता में वृद्धि तथा उनसे लाभप्रदता बढ़ाने के लिए उनके विविध उपयोग हेतु मूलभूत तथा नीतिपरक अनुसंधान का आयोजन।
  • कदन्नों की उन्नत उत्पादन एवं संरक्षण प्रौद्योगिकियों का समन्वय एवं विकास।
  • कदन्न उत्पादन एवं उपयोग पर प्रशिक्षण एवं परामर्श सेवाएं।
  • प्रौद्योगिकियों का प्रसार एवं क्षमता निर्माण।

राष्ट्रीय कदन्न वर्ष - 2018

कदन्न : प्राचीन श्रेष्ठ धान्य – एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प

स्वस्थ जीवन हेतु आपके दैनिक आहार में ग्लूटेन मुक्त पौष्टिक कदन्नों को शामिल करें : हमारा ध्येय, आपका स्वास्थ्य


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20 अगस्त 2018 को अद्यतित | अस्वीकरण (डिस्क्लेमर) | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) - भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर)