हमारे बारे में
अनुसंधान केंद्र
भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत ज्वार तथा अन्य कदन्नों पर बुनियादी एवं नीतिपरक अनुसंधान में व्यस्त एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
भाकअनुसं ज्वार, बाजरे एवं लघु कदन्नों पर अभासअनुप के माध्यम से ज्वार, बाजरे व अन्य कदन्नों के अनुसंधान कार्यों का समन्वय करता है एवं सुविधाएं प्रदान करता है विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों के साथ संबंध स्थापित करता है।
स्वीकृत जनशक्ति – हैदराबाद स्थित संस्थान के मुख्यालय, एवं इसके दो क्षेत्रीय केंद्रों अर्थात रबी ज्वार अनुसंधान केंद्र, सोलापुर तथा गैर-मौसमी पौधशाला, वरंगल में 17 विभिन्न विषयों में 41 तकनीकी, 21 प्रशासनिक एवं 27 कुशल सहायक कर्मचारियों के सहायता से 48 वैज्ञानिक कार्यरत हैं।
संस्थान हेतु महत्वपूर्ण वर्ष :
- 1958 : सर्वप्रथम 1958 में कपास, तिलहन एवं कदन्नों पर गहन अनुसंधान परियोजना (पिरकॉम) के अंतर्गत इस संस्थान की स्थापना हुई तथा यह संस्थान ज्वार आधारित फसल प्रणाली के साथ-साथ महत्वपूर्ण शुष्कक्षेत्र फसलों जैसे – ज्वार, अरंडी, मूंगफली, अरहर तथा कपास पर अनुसंधान कार्यों में व्यस्त था।
- 1966 : इसके बाद 1966 से यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्यरत था।
- 1970 : जनवरी, 1970 के दौरान यह अखिल भारतीय समन्वित ज्वार उन्नयन परियोजना का मुख्य एकक बन गया।
- 1987: रबी ज्वार उत्पादकता, उत्पादन में स्थिरता, उत्पाद उपयोग, एवं लाभप्रदता शामिल बुनियादी तथा नीतिपरक अनुसंधान को ज्यादा मजबूती प्रदान करने के लिए 16 नवंबर, 1987 में इसकी स्थापना राष्ट्रीय ज्वार अनुसंधान केंद्र के रूप में हुई।
- 1991: इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु ज्वार के मुख्य आवास स्थल केंद्रीय तथा दक्षिणी महाराष्ट्र एवं उत्तरी कर्नाटक में रबी ज्वार अनुसंधान को मजबूती प्रदान करने हेतु 1 अक्तूबर, 1991 को सोलापुर, महाराष्ट्र में रबी ज्वार अनुसंधान केंद्र नामक एक क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की गई।
- 1995: इसके अतिरिक्त मुख्य रूप से बिना मौसम ज्वार प्रजनन वंशक्रमों के बहुगुणन को सुविधा प्रधान करने हेतु 1995 में वरंगल, तेलंगाना में एक गैर-मौसमी पौधशाला की स्थापना की गई।
- 2009: राष्ट्रीय ज्वार अनुसंधान केंद्र का 2009 में ज्वार अनुसंधान निदेशालय के रूप में उन्नयन किया गया।
- 2014: ज्वार अनुसंधान निदेशालय का 2014 में भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान के रूप में उन्नयन हुआ।
भाकअनुसं के मुख्य अधिदेश (लक्ष्य):
- कदन्नों की उत्पादकता में वृद्धि तथा उनसे लाभप्रदता बढ़ाने के लिए उनके विविध उपयोग हेतु मूलभूत तथा नीतिपरक अनुसंधान का आयोजन।
- कदन्नों की उन्नत उत्पादन एवं संरक्षण प्रौद्योगिकियों का समन्वय एवं विकास।
- कदन्न उत्पादन एवं उपयोग पर प्रशिक्षण एवं परामर्श सेवाएं।
- प्रौद्योगिकियों का प्रसार एवं क्षमता निर्माण।









